नई दिल्ली:
देश में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने WhatsApp से कहा है कि ऐसे अपराधों में इस्तेमाल हो रहे डिवाइस IDs की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया जाए।

एक उच्च-स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसमें साइबर सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित विभागों ने भाग लिया। सरकार ने प्लेटफॉर्म से 45 दिनों के भीतर ऐसा सिस्टम तैयार करने को कहा है, जिससे संदिग्ध डिवाइस की पहचान कर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

क्या है “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम?
इस तरह के स्कैम में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे वीडियो कॉल या मैसेज के जरिए “गिरफ्तारी” का भय दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।

क्यों जरूरी है डिवाइस ब्लॉक करना?
अब तक स्कैमर्स नए-नए अकाउंट बनाकर ठगी जारी रखते थे। लेकिन डिवाइस ID ब्लॉक होने से एक ही फोन से बार-बार फ्रॉड करना मुश्किल हो जाएगा।

सरकार की आगे की योजना:

  • AI की मदद से फर्जी अकाउंट और डिवाइस की पहचान
  • संदिग्ध ऐप और नेटवर्क पर रोक
  • जांच एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय

निष्कर्ष:
सरकार का यह कदम साइबर अपराध पर नकेल कसने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे आम लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचाने में मदद मिलेगी।

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