शंभूगंज/बांका:
प्रखंड क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर सरकारी दावे भले ही बेहतर हालात दर्शाते हों, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। शंभूगंज के कई गांवों में आज भी किसानों को सुरक्षित बिजली सुविधा नहीं मिल पा रही है, जिससे वे जोखिम भरे तरीकों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

बालाचक, गोयड़ा समेत कई गांवों में एग्रीकल्चर कनेक्शन लेने के बावजूद किसानों को बिजली पोल उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में किसान बांस के सहारे बिजली तार खींचकर खेतों में मोटर चला रहे हैं। यह व्यवस्था न केवल अस्थायी है, बल्कि बेहद खतरनाक भी साबित हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, इस लापरवाही के कारण कई बार करंट लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
स्थानीय किसान सुरेश सिंह, विपुल सिंह सहित अन्य लोगों ने बताया कि वे लंबे समय से बिजली पोल की मांग कर रहे हैं, ताकि सुरक्षित ढंग से सिंचाई कार्य किया जा सके। लेकिन उनकी मांग अब तक अनसुनी ही बनी हुई है, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
यह समस्या सिर्फ एक-दो गांवों तक सीमित नहीं है। कैथा, सहदेवपुर, विरनौधा, टीना, महिसौथा सहित करीब दो दर्जन गांवों में किसान इसी तरह जोखिम उठाकर खेती कर रहे हैं।
बिजली विभाग द्वारा कनेक्शन तो दे दिया गया, लेकिन आवश्यक आधारभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि कोई गंभीर हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द बिजली पोल उपलब्ध कराने और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि किसानों की जान-माल की सुरक्षा के साथ खेती कार्य भी सुचारू रूप से जारी रह सके।
