ब्यूरो रिपोर्ट
बांका, बिहार:
बांका जिले में महिलाओं की शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाने वाली अक्षर आंचल योजना एक बार फिर बड़ी उपलब्धि के साथ सामने आई है। राज्य शिक्षा विभाग, जनशिक्षा के संयुक्त निदेशक के निर्देश पर रविवार को जिले के सभी प्रखंडों में बुनियादी साक्षरता की महापरीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई। कुल 152 संकुलों में परीक्षा केंद्र बनाए गए, जिनमें प्रत्येक प्रखंड में एक मॉडल परीक्षा केंद्र की विशेष व्यवस्था की गई थी। इन मॉडल केंद्रों को झालर और बैलून से सुसज्जित कर उत्सव जैसा माहौल बनाया गया, जिससे महिलाओं में उत्साह और आत्मविश्वास देखने को मिला।
परीक्षा दो पालियों में संपन्न हुई।
पहली पाली में 17,042 महिलाओं ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 10,774 महिलाएं परीक्षा में शामिल हो सकीं। दूसरी पाली में 29,695 पंजीकृत परीक्षार्थियों में से 29,087 महिलाएं उपस्थित रहीं।
कुल मिलाकर 39,861 नवसाक्षर महिलाओं ने परीक्षा में भाग लेकर जिले की साक्षरता मिशन को नई दिशा दी।
परीक्षा केंद्रों पर एक भावुक और उत्साहजनक दृश्य तब देखने को मिला जब कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर परीक्षा देने पहुँचीं। पंजीकरण के बाद वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा कक्ष में बैठीं यह दृश्य महिलाओं की शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
अक्षर आंचल योजना के अंतर्गत दलित, महादलित, अतिपिछड़ा तथा अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए उत्थान केंद्र और तालीमी मरकज के माध्यम से लगातार शिक्षा कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि निर्धारित लक्ष्य 41,060 के करीब पहुँचते हुए 39,861 महिलाओं ने परीक्षा देकर अपनी साक्षरता सिद्ध की।
साक्षरता विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी देवनारायण पंडित के अनुसार बांका जिले में 97 प्रतिशत से अधिक महिलाओं को साक्षर बनाया जा चुका है, जो राज्य स्तर पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इनमें 35,527 महादलित तथा 4,334 अल्पसंख्यक महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से सराहनीय रही।
महिलाओं की इस व्यापक भागीदारी ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और महिलाएं अब सशक्तिकरण की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। अक्षर आंचल योजना बांका जिले में सामाजिक परिवर्तन का एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है।
