ब्यूरो रिपोर्ट
प्रखंड के धौनी-बामदेव पंचायत अंतर्गत आदर्श ग्राम पिपराडीह में पिछले एक सप्ताह से प्रवाहित हो रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का समापन रविवार (28 दिसंबर) को विधि-विधान के साथ किया जाएगा। सात दिवसीय इस ज्ञान महायज्ञ के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के भावुक मिलन प्रसंग के उपरांत हवन, पूजन एवं पूर्णाहुति संपन्न होगी, जिसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

कथा के छठे दिन शनिवार को श्रीकृष्ण–रुक्मिणी विवाह प्रसंग के दौरान पंडाल में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी। जैसे ही विवाह का प्रसंग आरंभ हुआ, शहनाइयों की मधुर धुनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर आनंद व्यक्त किया। वृंदावन से पधारीं सुप्रसिद्ध कथावाचिका ऊष्मा किशोरी जी ने रुक्मिणी हरण एवं विवाह की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया, जिससे श्रोता भाव-विभोर हो उठे। भगवान श्रीकृष्ण एवं रुक्मिणी जी की सजीव झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
वरमाला के दृश्य पर महिलाएं एवं पुरुष श्रद्धालु मंगल गीत गाते हुए झूम उठे। प्रसिद्ध भजन गायक प्रदीप ब्रजवासी ने आज मेरे श्याम की शादी है सहित एक से बढ़कर एक विवाह गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। वहीं, कार्यक्रम का सशक्त एवं प्रभावी संचालन क्षेत्र के प्रसिद्ध कथावाचक ओंकारेश्वर जी ने किया, जिन्होंने विवाह प्रसंग के आध्यात्मिक महत्व को सरल एवं रोचक ढंग से समझाया।
कथा के मुख्य यजमान आरएसजे कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमरेंद्र कुमार चौधरी एवं उनकी धर्मपत्नी अर्पणा कुमारी ने विधि-विधान से कन्यादान एवं पूजन की रस्में निभाईं। कथा के पश्चात श्रद्धालुओं, विशेषकर बच्चों ने बाहर लगे मेले का भी भरपूर आनंद लिया।
इस भव्य धार्मिक आयोजन की सफलता में आयोजन समिति के सदस्यों के साथ-साथ समस्त पिपराडीह ग्रामवासियों की भूमिका सराहनीय रही। गांव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने तन-मन-धन से सहयोग कर आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। समिति के सदस्यों ने दिन-रात मेहनत कर श्रद्धालुओं के बैठने, प्रसाद ग्रहण करने एवं कथा श्रवण की समुचित व्यवस्था की।
आयोजन समिति ने बताया कि रविवार को कथा के अंतिम दिन श्रीकृष्ण–सुदामा मिलन प्रसंग के साथ हवन, पूजन एवं पूर्णाहुति होगी। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। समिति एवं ग्रामवासियों ने क्षेत्र की धर्मप्रेमी जनता से अपील की है कि वे अंतिम दिन कथा श्रवण एवं भंडारे में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित करें।
