ब्यूरो रिपोर्ट

सरकार द्वारा पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र में किसान धान की पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रशासन द्वारा कई दोषी किसानों पर कार्रवाई किए जाने के बावजूद भी अन्य किसानो में इसका कोई खास असर दिखाई नहीं देता।
क्षेत्र में लगातार कई गांवों में हार्वेस्टर से धान की कटाई कराई जा रही है, जिसके बाद किसान खेतों में ही पराली में आग लगा दे रहे हैं। पराली जलाने से जहां पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, वहीं खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी बर्बाद हो रही है।
रविवार को भी कैथा, सहदेवपुर, गिद्धौरा सहित कई बहियारों में किसानों ने पराली में आग लगाने की घटना को अंजाम दिया। कृषि विभाग लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है और किसानों को आगाह कर रहा है कि पराली जलाने से पर्यावरण, मिट्टी और फसल चक्र पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। बावजूद इसके किसान सरकारी नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।
पराली जलाने की शिकायत पर शंभूगंज प्रखंड के कृषि पदाधिकारी संकेत तिवारी ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी और दोषी किसानों के कृषि पंजीयन रद्द किए जाएंगे। साथ ही सरकारी योजनाओं के लाभ से उन्हें वंचित करते हुए विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
