मेंथा के चक्रवात ने किसानों के अरमानों पर फेरा पानी, पकी धान फसलें हुईं धाराशायी।

बांका/बिहार। प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों के माथे पर एक और चिंता की लकीर खींच दी है मेंथा के चक्रवात ने। गुरुवार की रात आई तेज हवा और मूसलाधार बारिश ने इलाके के खेतों में तबाही मचा दी। कई जगहों पर धान की पकी फसलें पूरी तरह गिर गईं, जिससे किसानों के अरमानों पर जैसे पानी फिर गया हो।

क्षेत्र के विभिन्न गांवों—बौंसी, पंजवारा, महेशपुर, कसवा, अम्बा, बरमसिया सहित आसपास के इलाकों में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने खेतों में खड़ी फसलों को तहस-नहस कर दिया। किसानों ने बताया कि इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन चक्रवात के कारण खेतों में लगी पकी फसलें पूरी तरह जमीन पर बिछ गई हैं। कई जगहों पर खेतों में पानी भर जाने से फसल सड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।

स्थानीय किसान प्रमोद पासवान बताते हैं, “धान की बालियां पूरी तरह पक चुकी थीं, बस कुछ ही दिनों में कटाई शुरू करने की योजना थी। लेकिन रात में चली तेज हवा और भारी बारिश ने सब कुछ चौपट कर दिया। अब जो फसल गिरी है, वह सड़ने लगी तो मेहनत और लागत दोनों बर्बाद हो जाएंगे।”
इसी तरह मदन बैठा ने बताया कि खेतों में पानी जमा हो जाने से धान कटाई में अब कई दिनों की देरी होगी। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने पहले से मड़ाई की तैयारी कर रखी थी, उनके सामने अब अतिरिक्त खर्च का संकट खड़ा हो गया है।
कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार, बांका क्षेत्र और आसपास के इलाकों में करीब 70 से 80 प्रतिशत धान की फसलें हवा और बारिश से प्रभावित हुई हैं। विभाग की टीम द्वारा नुकसान का आकलन शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि प्रभावित किसानों को सरकारी मुआवजा योजना के तहत मदद दी जाएगी।
इस बीच, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि शीघ्र सर्वे कराकर किसानों को उचित राहत राशि प्रदान की जाए, ताकि वे आगामी रबी फसल की बुवाई समय पर कर सकें।
प्राकृतिक आपदाओं के इस कहर से एक बार फिर किसान समुदाय की मेहनत और उम्मीदों पर भारी चोट पहुंची है। ग्रामीणों का कहना है कि अब सरकार को जल्द राहत देने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
