ब्यूरो रिपोर्ट,
पटना, बिहार:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का चुनावी बिगुल बजते ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जैसे-जैसे 10 अक्टूबर, यानी पहले चरण के नामांकन की तारीख नज़दीक आ रही है, राजनीतिक दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बैठकों का दौर तेज होता जा रहा है।

गठबंधन और महागठबंधन—दोनों ही खेमों में अब तक सीटों का अंतिम बंटवारा नहीं हो पाया है, लेकिन इसके बावजूद सभी दल अपनी-अपनी जीत के दावे करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। राजधानी पटना से लेकर दिल्ली तक बैठकों और गुप्त रणनीतियों का दौर जारी है। दलों के केंद्रीय और राज्य स्तर के नेता सक्रिय रूप से संपर्क में हैं।
बीते मंगलवार को दिल्ली में भाजपा और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के बीच अहम बैठक हुई। इस बैठक में भाजपा के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय ने लोजपा प्रमुख चिराग पासवान से मुलाकात की। इससे दो दिन पूर्व धर्मेंद्र प्रधान ने तीन अन्य प्रमुख नेताओं ललन सिंह जदयू, जीतन राम मांझी हम और उपेंद्र कुशवाहा रालोमा से भी विस्तार से चर्चा की।
इसके अतिरिक्त, 6 अक्टूबर को प्रधान ने जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से उनके आवास पर मुलाकात की। बैठक के बाद उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी और सीट बंटवारे पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच भी इस मुद्दे पर बंद कमरे में बैठक हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो जदयू और भाजपा के बीच सीटों को लेकर खींचतान बरकरार है, लेकिन उच्चस्तरीय वार्ताओं के ज़रिए समाधान निकालने की कोशिशें जारी हैं।
दूसरी ओर, महागठबंधन खेमे में भी हलचल तेज है। बुधवार को हुई बैठक के बाद कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने दावा किया कि महागठबंधन में लगभग सभी दलों के बीच सहमति बन चुकी है और एक-दो सीटों को छोड़कर सभी पर फैसला हो गया है। उन्होंने कहा कि शाम तक सीटों की फाइनल सूची जारी कर दी जाएगी।
पटना स्थित राजनीतिक दलों के कार्यालयों में लगातार बैठकों का सिलसिला जारी है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की अध्यक्षता में भी प्रमुख प्रकोष्ठों की बैठकें चल रही हैं। वहीं, जिन बैठकों में सहमति नहीं बन पा रही, वहां नेता अपने निजी आवास पर गुप्त मुलाकातें कर रहे हैं।
चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और अब देखना होगा कि गठबंधन और महागठबंधन किस फार्मूले पर सीटों का बंटवारा करते हैं और इसका असर मतदाताओं पर कितना पड़ता है।
