ब्यूरो रिपोर्ट,
नई दिल्ली:
भारतीय आसमान पर छह दशकों तक अपनी दहाड़ से दुश्मनों की रूह कंपाने वाले मिग-21 लड़ाकू विमान ने बुधवार को औपचारिक रूप से वायुसेना के बेड़े से विदाई ले ली। चंडीगढ़ एयरबेस पर आयोजित भावुक समारोह में आखिरी उड़ान के बाद मिग-21 ने इतिहास के पन्नों में जगह बना ली। इसकी जगह अब स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए तेजस मार्क-1ए वायुसेना की नई ताकत बनेगा।1963 में शामिल, 2025 में विदाई

1963 में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े में शामिल हुआ मिग-21, पहला सुपरसोनिक जेट था जिसने भारत को सैन्य रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। हालांकि, इसके बाद के वर्षों में इसे “उड़ता ताबूत” कहा जाने लगा, क्योंकि 1970 के दशक से लगातार हादसों में यह चर्चा में रहा। अब तक 170 से अधिक पायलट और 40 नागरिक मिग-21 की दुर्घटनाओं में जान गंवा चुके हैं।

1965, 1971 और 1999 कारगिल युद्ध में मिग-21 ने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए।
1971 में ढाका पर बमबारी कर पाकिस्तान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया।
2019 में विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान ने इसी विमान से पाकिस्तानी एफ-16 को मार गिराया।
रूसी मूल के इस विमान को 1985 में ‘मिग-21 बाइसन’ के रूप में अपग्रेड किया गया। भारतीय वायुसेना के पास बचे 54 मिग-21 को भी इसी वेरिएंट में तब्दील किया गया, जिससे इसकी युद्धक क्षमता में सुधार लाया गया।
मिग-21 की विदाई के साथ ही वायुसेना की स्क्वाड्रनों की संख्या 29 रह गई है, जबकि आदर्श संख्या 42 होनी चाहिए। इसी कमी को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने 25 सितम्बर को एचएएल को 97 एलसीए तेजस मार्क-1ए का ऑर्डर दिया है। अब कुल 180 तेजस विमानों का निर्माण होगा, जो आने वाले वर्षों में वायुसेना की रीढ़ बनेंगे।
