त्रिवेणीगंज/सुपौल:

अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज के मुख्य द्वार पर संचालित दृष्टि फार्मा नामक दवा दुकान पर गुरुवार को हुई छापेमारी से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सिविल सर्जन के आदेश पर सुपौल ड्रग्स इंस्पेक्टर निर्भय कुमार गुप्ता, त्रिवेणीगंज ड्रग्स इंस्पेक्टर सरफराज आलम और राघोपुर ड्रग्स इंस्पेक्टर पूजा कुमारी की टीम ने संयुक्त रूप से जांच की।

जांच के दौरान दो तरह की संदिग्ध दवाओं के नमूने लैब जांच के लिए भेजे गए, जबकि पांच प्रकार की दवाओं का बिल उपलब्ध नहीं कराया गया। दुकान संचालक को 10 दिन का समय दिया गया है, अन्यथा विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

ड्रग्स इंस्पेक्टर ने स्पष्ट किया कि अस्पताल से कितनी दूरी पर दवा दुकान होनी चाहिए, इसकी कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है। बावजूद इसके, अस्पताल के मुख्य द्वार से महज 10 मीटर की दूरी पर दुकान का संचालन गंभीर सवाल खड़े करता है।

इससे पूर्व अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने पत्रांक–221 दिनांक–26.07.2023 को जिलाधिकारी सुपौल को पत्र भेजकर दुकान संचालक राजेश चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि राजेश चौधरी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का हवाला देकर अस्पताल में अवैध रूप से घुसता है, कर्मचारियों पर दबाव बनाता है और प्रसूताओं से आशा कर्मियों की मिलीभगत में 2500 रुपये तक वसूलता है।

जांच में यह भी सामने आया कि दुकान विपिन कुमार के नाम पर रजिस्टर्ड है, जबकि संचालन सोशल मीडिया के आड़ में राजेश चौधरी करता है। कार्रवाई की भनक लगते ही आसपास के कई दवा दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं।

स्थानीय लोगों ने इसे मरीजों के साथ धोखा बताते हुए जिलाधिकारी से दृष्टि फार्मा को तत्काल सील करने और अवैध कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है।

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