बौंसी बांका – जिलाधिकारी अंशुल कुमार के निर्देश पर सीएनडी हाई स्कूल के सभागार में गुरुवार को मासिक गुरु गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का शुभारंभ प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी शैलेन्द्र कुमार विश्वास की उपस्थिति में किया गया। इस कार्यक्रम में प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक, मध्य विद्यालय और 10 प्लस टू उच्च विद्यालय के प्रधानाध्यापक मुख्य रूप से उपस्थित थे।
प्रधानाध्यापकों के प्रयासों की सराहना
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि विभागीय योजनाओं और दिशा-निर्देशों को धरातल पर लागू करना आप सभी की मेहनत और ईमानदार प्रयासों के बिना संभव नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य देने के साथ-साथ उन्हें अच्छा नागरिक बनाने की जिम्मेदारी भी शिक्षकों पर है।
मूल बिंदुओं पर चर्चा
गोष्ठी के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। इसमें विद्यार्थियों के आधार आईडी निर्माण, यू डाइस में कक्षा 1 से 12 तक के डाटा की एंट्री और इंपोर्ट, बच्चों को नियमित होमवर्क देने और उसकी जांच करने के निर्देश शामिल थे। इसके अलावा, ऐसे विद्यालय जहां पेयजल की व्यवस्था नहीं है, उनके बारे में प्रतिवेदन मांगा गया।
शौचालय की सफाई और मध्यान भोजन पर ध्यान
विद्यालयों में शौचालयों के नियमित उपयोग और उनकी साफ-सफाई के अलावा, विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मध्यान भोजन देने पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया। बैठक में मौजूद बांका के आरपी सैय्यद जावेद हुसैन ने भी इस बात पर जोर दिया कि सरकार विद्यालयों में हर प्रकार की सुविधाएं प्रदान कर रही है, और अब शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को बेहतर शिक्षा दें ताकि वे कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बन सकें।
बैठक में मुख्य अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर एमडीएमआरपी उदय कांत झा, बीआरपी रविंद्र मिश्रा, दिलीप साह, कार्यालय लेखपाल सुनीता शर्मा, प्रधानाध्यापक राजीव रंजन, कौशल राज, दिलीप मिश्रा, शिक्षक उत्तम झा सहित अन्य प्रधानाध्यापक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
विद्यालय में बेहतर कार्य के लिये प्रधानाध्यापक को किया गया सम्मानित
गुरु गोष्ठी के दौरान मध्य विद्यालय जबड़ा के प्रधानाध्यापक श्रीकांत यादव को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि जिलाधिकारी अंशुल कुमार के निर्देश पर वैसे विद्यालय जहां हर प्रकार की बेहतर व्यवस्थाएं होती हैं, जैसे मध्यान भोजन, बच्चों की उपस्थिति, बेहतर पठन-पाठन, और पोशाक की व्यवस्था, उन विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को चिन्हित कर सम्मानित किया जाता है। गुरु गोष्ठी के दौरान इन्हीं मानकों पर खरा उतरने वाले प्रधानाध्यापकों को सम्मानित करने का कार्य किया जाता है।