मंदार पर्वत: पौराणिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने की जरूरत

मंदार पर्वत: पौराणिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने की जरूरत

मंदार पर्वत: समुद्र मंथन की पावन भूमि

मंदार पर्वत को हिंदू पौराणिक कथाओं में समुद्र मंथन का केंद्र माना जाता है। यह वही पवित्र स्थल है, जहां से 14 दिव्य रत्न प्राप्त हुए थे, जिनमें अमृत भी शामिल था। मान्यता है कि अमृत की बूंदें जहां-जहां गिरीं, वहां महाकुंभ का आयोजन होता है। इस पावन भूमि पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने सोमवार को पहुंचकर अपने विचार साझा किए।

मंदार पर्वत का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि सत्य और आध्यात्मिकता को कभी भी स्थायी रूप से दबाया नहीं जा सकता। जैसे सूर्य का प्रकाश बादलों से अधिक समय तक छिपा नहीं रह सकता, वैसे ही मंदार पर्वत की पौराणिक महिमा भी अब विश्व के सामने प्रकट हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रयागराज में कुंभ के अवसर पर जब पूरा विश्व आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो रहा है, तब मंदार पर्वत का महत्व और अधिक स्पष्ट होता जा रहा है।

दैवीय शक्तियों का अद्भुत संगम

मंदार पर्वत केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि दैवीय शक्तियों का केंद्र भी है। यहां सौभाग्य कुंड, चकावर्त कुंड, भगवान नरसिंह गुफा, और शिखर पर भगवान शिव का प्रकट रूप स्थित है। यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर भी है।

वैश्विक स्तर पर मंदार पर्वत की पहचान जरूरी

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि बिहार सरकार एवं केंद्र सरकार को इस ऐतिहासिक स्थल की गरिमा को संजोते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। यह पर्वत भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है, जिसे अब और अधिक प्रचारित और संरक्षित किया जाना चाहिए।

इस पावन अवसर पर ख्यातिप्राप्त भागवत कथा वाचक श्री संजीव कृष्ण ठाकुर जी, मनोज बाबा और अन्य संत-महात्माओं ने भगवान काशी विश्वनाथ मंदिर, भगवान नरसिंह गुफा सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदार पर्वत की दिव्यता को अनुभव करते हुए इसके संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।

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