बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी बी.एम. पार्वती को बड़ी राहत मिली है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जारी समन को खारिज कर दिया है। यह समन मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) से जुड़े भूमि आवंटन घोटाले की जांच के संबंध में जारी किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
ईडी ने पार्वती को पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत पूछताछ के लिए तलब किया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने MUDA से कथित रूप से अवैध रूप से 14 भूखंड प्राप्त किए। यह मामला मैसूर के केसारे गांव की एक भूमि से जुड़ा है, जिसे पहले अधिग्रहित किया गया था और बाद में कथित रूप से नियमों के विपरीत गैर-अधिसूचित कर दिया गया।
पार्वती के अनुसार, यह भूमि पहले उनके भाई के नाम पर थी, जिसे उन्होंने 2010 में पारिवारिक समारोह के दौरान उपहार के रूप में प्राप्त किया था। बाद में, इस भूमि का अधिग्रहण MUDA ने किया और बदले में मुआवजे के रूप में भूखंड आवंटित किए। पार्वती का दावा है कि उन्होंने अक्टूबर 2024 में वैकल्पिक भूखंड को वापस कर दिया था, जिससे उनका इस पर कोई अधिकार नहीं रहा।
हाईकोर्ट ने क्यों दिया समन खारिज करने का आदेश?
पार्वती ने ईडी के समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनके वकील ने तर्क दिया कि पार्वती के खिलाफ कोई वित्तीय गड़बड़ी का सीधा सबूत नहीं है और न ही कोई मौद्रिक लाभ मिला है।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने ईडी की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा,
“इस मामले की जांच में ऐसी कौन सी आपात स्थिति है? जब इस मामले की सुनवाई पहले से ही चल रही है, तब ईडी को इतनी जल्दी क्या है?”
कोर्ट ने कहा कि ईडी को मामले में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और 10 फरवरी तक के लिए समन को खारिज कर दिया।
क्या होगा आगे?
इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी। तब तक के लिए पार्वती को ईडी के समक्ष पेश होने की जरूरत नहीं है। हालांकि, इस फैसले से यह मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यदि ईडी को नए सबूत मिलते हैं, तो वह फिर से समन जारी कर सकता है।
यह मामला कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे एक घोटाले के रूप में प्रचारित कर रहा है। वहीं, सिद्धारमैया सरकार इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है। अब देखना होगा कि 10 फरवरी की सुनवाई में क्या नया मोड़ आता है।
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