संयुक्त राष्ट्र की ‘चुनिंदा’ रिपोर्ट पर भारत का कड़ा जवाब: ‘हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करें’

भारत ने जम्मू-कश्मीर (J&K) और मणिपुर को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा हाल ही में की गई टिप्पणियों को सख्ती से खारिज कर दिया है, इसे “चुनिंदा” और पक्षपाती बताया है। भारतीय सरकार ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया है कि वह वैश्विक मानवाधिकार मुद्दों पर अपनी चयनात्मक दृष्टि की समीक्षा करे।

यह बयान संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों द्वारा इन दोनों क्षेत्रों में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर उठाई गई चिंताओं के जवाब में आया है। भारत के स्थायी मिशन ने विश्व निकाय की आलोचना करते हुए कहा कि यह “एकतरफा दृष्टिकोण” अपना रहा है, जो जमीनी हकीकत और शांति बनाए रखने के लिए भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों को नजरअंदाज करता है।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक कड़े बयान में कहा, “हम जम्मू-कश्मीर और मणिपुर के बारे में संयुक्त राष्ट्र के चयनात्मक और निराधार आरोपों को खारिज करते हैं। ये दावे न केवल भ्रामक हैं, बल्कि वे भारत के सामने मौजूद व्यापक सुरक्षा चुनौतियों, विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद, को भी नजरअंदाज करते हैं।”

नई दिल्ली ने यह भी बताया कि इन क्षेत्रों में अस्थिरता फैलाने में बाहरी तत्वों की भूमिका को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनदेखा किया जा रहा है, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में। सरकार ने यह दोहराया कि वह लोकतांत्रिक सिद्धांतों और मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान करने का प्रयास कर रही है।

‘आइना देखें’: संयुक्त राष्ट्र पर भारत की तीखी प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र पर वैश्विक मानवाधिकार उल्लंघनों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए भारत ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र को पहले खुद का आकलन करना चाहिए और अपनी विसंगतियों को दूर करना चाहिए, फिर भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करनी चाहिए।”

अधिकारियों ने यह भी जोर देकर कहा कि भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते, शिकायतों के समाधान और न्याय सुनिश्चित करने के लिए मजबूत तंत्र रखता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम एक संप्रभु राष्ट्र हैं, जिनके पास स्वतंत्र संस्थान, एक सक्रिय नागरिक समाज और मानवाधिकारों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता है।”

संयुक्त राष्ट्र की चिंताएं

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय द्वारा कथित तौर पर उठाई गई चिंताओं में जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में अति बल प्रयोग, भेदभाव और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध जैसी बातें शामिल थीं। संगठन ने भारतीय सरकार से आग्रह किया कि वह प्रभावित समुदायों के अधिकारों की रक्षा करे और संघर्षों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने के लिए संवाद को प्रोत्साहित करे।

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

भारत की कड़ी प्रतिक्रिया को विभिन्न राजनीतिक नेताओं का समर्थन मिला है, जिन्होंने इसे आंतरिक मामलों में अनुचित विदेशी हस्तक्षेप बताया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र को भारत को निशाना बनाने के बजाय वास्तविक वैश्विक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।”

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने अपनी चिंताओं को दोहराया है और इन संवेदनशील क्षेत्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।

निष्कर्ष

यह ताजा विवाद भारत और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच चल रहे मतभेदों को उजागर करता है, विशेष रूप से सुरक्षा और मानवाधिकारों से जुड़े मामलों पर वैश्विक दृष्टिकोण को लेकर। भारत जहां बाहरी आलोचनाओं को खारिज करने में दृढ़ बना हुआ है, वहीं मानवाधिकारों के प्रवर्तन को लेकर वैश्विक बहस और तेज हो रही है।

 

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