जीवन चलने का नाम नहीं, दौड़ने का..

अनेकों बार हमारे जीवन में कुछ ऐसे पल आते हैं, जैसे लगता हैं की अब हम आगे की ओर बढ़ नहीं पायेंगे, लेक़िन सदैव याद रखिये, यह आगे नहीं बढ़ने की मनोस्थिति हमारे विचारों के द्वारा उतपन्न होती हैं। न की परिस्थितियों के द्वारा, और इस स्थिति मे हमारा आत्मविश्वास और हमारा दृढ संकल्प असंभव को संभव मे बदलने की महाशक्ति रूपी घोड़ा हमारे ख़ुद के अंदर ही हैं। अगर थोड़ी सी भी आपकी पकड़ ढीली हुई तो समझिये की आपको सीधे नाकारात्मकता और अंधकार की खाई में गिरने से कोई भी नहीं बचा सकता। इसलिए ख़ुद के भीतर छुपी हुई अपार प्रतिभा और शक्ति को विश्वास के साथ निकाले, आगे के रास्ते ख़ुद ब खुद बनते जायेंगे। और हमेसा इस बात को याद रख्खे की बड़ी सफलता एक दिन मे नहीं मिलती। शिद्दत और दिल से किया प्रयास आपको सीधे मंजिल की तरफ़ लें जाती हैं। इसलिए उठो और अपने अंदर की ताकत से रास्ते मे आ रहें उन चट्टानों को उखाड़ फेक़े और विश्वास के साथ शुरुआत करें, आगे बढ़ते रहें। क्योंकि जीवन चलने का नाम नहीं दौड़ने का नाम हैं, चाहे सुबह हो या शाम दौड़ते रहें…

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